सफ़र को किसी हमसफ़र की ज़रूरत तो नहीं थी..पर किस्सों के साथ का नूर उसपे अलग ही जचता है
हर राह पे बनती चली जाती हैं कितनी ही कहानियाँ ...दिल जिसे यादों की महफूज़ तिज़ोरी में रखता है
इतनी कहानियाँ छुपी है हर मुसाफ़िर के सीने में...के जब ज़िक्र उनका हो तो नज़ारा रोके न रुकता है
सिर्फ सुनके या महज़ तस्वीरों से बात नहीं बनती....ये वो अनुभव है जो बस इनसे गुज़रकर ही मिलता है
किस्से भी किसी तस्वीर में क्या कैद हो पाते .....पर कल्पनाओं पर सीमाओं का क्या ज़ोर चलता है
बाँटना चाहुँ जब मैं उन सभी लम्होँ के पन्नो को .... कलम के रास्ते वो धीरे से शब्दों में बिखरता है
अनमोल हैं वो पल जो उंमुक्त हवा के साथ बह निकले.....क्यूँकि कोई इरादा आज भी सच होने कि कोशिश करता है
कहीं नीले सफ़ेद गुब्बारों कि उड़ती हुई छत है तो कहीं ....लहरों के साथ उठता आत्मविश्वास दिल में उतरता है
कहीं गर्व से भरे ऊँचे पहाड़ खड़े हैं.... तो कहीं झरनों और नदियों के रास्ते संगीत बहता है
नयी जगह पे मिलते हैं नए लोग और नए नज़रिये ...नयी संस्कृति और नयी सरहदों का तोहफा साथ मिलता है
तो निकल पड़ते हैं हम दिल की प्यारी बातों में आकर.....यूँही खुद से खुद की मुलाकातों का सिलसिला लगा रहता है
