तेरा नाम मैंने पुकारा तो नहीं था
लेकिन तुझसे रूठना गवारा भी नहीं था
सोचा की जी लेंगे तेरे बिन हम
पर पाया कोई तुझसे प्यारा ही नहीं था
आवाज़ दी किसी ने जब कभी तो
लगा कहीं ये तेरा इशारा तो नहीं था
हालात अब और बिगड़ चुके हैं
दोनों में से किसी ने इन्हें संवारा जो नहीं था
एक बार जिस पे यकीन था हमको
फिर वो एहसास दोबारा तो नहीं था
रब ने छीन लिया है जो हमसे
वो लम्हा कभी भी हमारा तो नहीं था
डूबते चले गये हम पछतावे के दरिया मे
राहतों का कोइ किनारा जो नही था
तेरा ज़िक्र भी आंखों को नम कर जाता है
नज़रों से तुमको उतारा तो नही था
