suruchi verma

Monday, September 12, 2011

DHADKAN MEHARBAAN HAI

हम चल रहे हैं या ये राहों की उड़ान है...
सासें चल रही हैं या धड़कन  मेहरबान हैं...

सच पूछो तो खुद का होश अब रहा नहीं .....
क्यूँ दिल की बातों को ज़ुबां से कभी कहा नहीं.....
जिन पर हम चल रहे हैं अब तक,
क्या वो उस रब के कदमों के निशान हैं.
सासें चल रही हैं या धड़कन  मेहरबान हैं...

वजह कोइ मिल जाये तो उस पर ही मिट जाये हम...
दिल में ना उतारे तो कैसे सताएगा कोइ गम....
कभी लगता सबकुछ अपना तो कभी,
ये सारी दुनिया वीरान है...
सासें चल रही हैं या धड़कन  मेहरबान हैं...

चलो ज़िंदगी से नया वादा करके देखते हैं...
किसी बेखबर ख्वाहिश के दर पे माथा टेकते हैं....
ज़िंदगी ये छोटा सा बाज़ार है जिसमे,
हज़ारो ख्वाबो की दुकान हैं,
सासें चल रही हैं या धड़कन  मेहरबान हैं...

एक नगमा चुन लिया जो दिल ने कभी...
गुम हो जाते हैं अकसर उसके सारे साज़ सभी...
पत्त्थरो से डर भी जाये जो कोइ,
सामने  तो ढेरो चट्टान हैं.....
सासें चल रही हैं या धड़कन  मेहरबान हैं...

कुछ दूर बहा ले गया वो अजनबी हवा का झोंका.....
तस्वीर सपने जोड के आखो ने दिया दिल को धोखा....
कोरे कागज़ पे ही निखरता...
 रंगों का जाहां है,
सासें चल रही हैं या धड़कन  मेहरबान हैं...




1 comment:

  1. सासें चल रही हैं या धड़कन मेहरबान हैं...

    ReplyDelete